गुड्डा बांध

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गुड़ा बांध क्या है

• गुड़ा बांध राजस्थान के सिरोही ज़िले में बना एक बांध है।

• यह बांध सिरोही ज़िले की जल-व्यवस्था का एक हिस्सा है जो इस क्षेत्र में सिंचाई और स्थानीय जल आपूर्ति के लिए उपयोगी माना जाता है।

• सिरोही ज़िला भौगोलिक रूप से अरावली पर्वत श्रृंखला के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और यहीं से होकर पश्चिमी बनास नदी जैसी महत्वपूर्ण नदियां निकलती हैं।

सिरोही ज़िले का भौगोलिक परिचय 

• सिरोही ज़िला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है और इसकी सीमा गुजरात राज्य से भी लगती है।

• ज़िले का क्षेत्रफल लगभग 5,139 वर्ग किलोमीटर है।

• यह क्षेत्र अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यहां माउंट आबू जैसा राजस्थान का इकलौता हिल स्टेशन भी स्थित है।

• सिरोही ज़िले से होकर बहने वाली प्रमुख नदियों में पश्चिमी बनास  सुकड़ी जवाई और सूकली जैसी नदियां शामिल हैं।

• पश्चिमी बनास नदी का उद्गम सिरोही ज़िले में ही अरावली की दक्षिणी पहाड़ियों से होता है और यह आगे चलकर गुजरात राज्य में बहती हुई कच्छ के रण जा मिलती है।

सिरोही में जल संकट की पृष्ठभूमि

• सिरोही ज़िला राजस्थान के उन ज़िलों में गिना जाता है जिन्हें भूजल के मामले में डार्क ज़ोन घोषित किया गया है  यानी यहां भूजल का दोहन उसकी प्राकृतिक पुनर्भरण क्षमता से कहीं अधिक हो चुका है।

• सर्दियों में ही यहां पेयजल की समस्या शुरू हो जाती है और गर्मियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि इलाके के तालाब नाले और अन्य पेयजल स्रोत सूखने लगते हैं।

• ज़िले में भूजल की कमी के कारण कुओं और हैंडपंपों में भी पानी की उपलब्धता बहुत घट जाती है।

• इसी वजह से सिरोही ज़िले में समय-समय पर सांसदों और विधायकों द्वारा संसद व विधानसभा में जल संकट का मुद्दा उठाया जाता रहा है और नर्मदा नहर व अन्य बाहरी स्रोतों से पानी लाने के प्रस्ताव भी चर्चा में रहे हैं।

• ऐसे शुष्क और जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में गुड़ा बांध जैसे स्थानीय बांध और तालाब क्षेत्र के लोगों तथा किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

क्षेत्र के अन्य जल स्रोत और बांध

1. सिरोही ज़िले में गुड़ा बांध के अलावा कई अन्य छोटे-बड़े जल स्रोत भी मौजूद हैं जो मिलकर क्षेत्र की पानी की ज़रूरतों को पूरा करते हैं

2. नक्की झील — माउंट आबू में स्थित राजस्थान की सबसे ऊंचाई पर बसी झील जो पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से बहुत प्रसिद्ध है।

3. पश्चिमी बनास नदी पर बने बांध — जैसे आबू रोड क्षेत्र के पास बनी जल-संग्रहण संरचनाएं जो सिंचाई और भूजल रिचार्ज में मदद करती हैं।

4. धनारी बांध — आबू रोड से पहले पश्चिमी बनास नदी पर बना एक बांध जो स्थानीय सिंचाई के लिए उपयोगी है।

5. बत्तीसा नाला परियोजना — सिरोही ज़िले में सिंचाई और पेयजल सुविधा के लिए प्रस्तावित एक परियोजना।

6. इन सभी जल स्रोतों के साथ गुड़ा बांध भी क्षेत्र की स्थानीय सिंचाई और जल आपूर्ति व्यवस्था का एक हिस्सा माना जाता है।

सिंचाई और कृषि पर प्रभाव

• सिरोही ज़िले में खेती मुख्य रूप से मानसून की बारिश और स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर करती है।

• गुड़ा बांध जैसे स्थानीय बांधों का पानी आसपास के गांवों में रबी और खरीफ दोनों सीज़न की फसलों की सिंचाई में सहायक होता है।

• क्षेत्र में मक्का गेहूं चना तिलहन जैसी फसलें प्रमुखता से उगाई जाती हैं  जिनके लिए सिंचाई के पानी की नियमित आवश्यकता रहती है।

• स्थानीय बांधों से भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलती है,

 जिससे आसपास के कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता कुछ हद तक बेहतर बनी रहती है।

• गरासिया और भील जैसी आदिवासी जनजातियां भी सिरोही ज़िले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निवास करती हैं 

सिंचाई और कृषि पर प्रभाव

• सिरोही ज़िले में खेती मुख्य रूप से मानसून की बारिश और स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भर करती है।

• गुड़ा बांध जैसे स्थानीय बांधों का पानी आसपास के गांवों में रबी और खरीफ दोनों सीज़न की फसलों की सिंचाई में सहायक होता है।

• क्षेत्र में मक्का, गेहूं, चना, तिलहन जैसी फसलें प्रमुखता से उगाई जाती हैं जिनके लिए सिंचाई के पानी की नियमित आवश्यकता रहती है।

• स्थानीय बांधों से भूजल स्तर को बनाए रखने में भी मदद मिलती है जिससे आसपास के कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता कुछ हद तक बेहतर बनी रहती है।

• गरासिया और भील जैसी आदिवासी जनजातियां भी सिरोही ज़िले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निवास करती हैं और इन समुदायों के लिए स्थानीय जल स्रोत आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार हैं।

गुजरात-राजस्थान जल-बंटवारे से जुड़ा पहलू

सिरोही ज़िले से होकर बहने वाली पश्चिमी बनास नदी आगे चलकर गुजरात राज्य में प्रवेश करती है जहां दांतीवाड़ा बांध जैसा एक बड़ा बांध बना हुआ है।

इस वजह से सिरोही ज़िले में बनने वाले छोटे बांध और एनिकट कई बार अंतर-राज्यीय जल-बंटवारे की चर्चा का भी हिस्सा बनते हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग रहती है कि सिरोही ज़िले में बहने वाला अतिरिक्त पानी व्यर्थ में गुजरात की ओर बहकर न जाए बल्कि उसे स्थानीय स्तर पर बांधों और एनिकट के ज़रिए रोककर क्षेत्र की सिंचाई व पेयजल ज़रूरतों के लिए उपयोग किया जाए।

इसी संदर्भ में गुड़ा बांध जैसी स्थानीय जल-संग्रहण संरचनाओं का महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि ये सीमा पार जाने वाले पानी को कुछ हद तक स्थानीय स्तर पर ही रोकने में मदद करती हैं।

सामान्य चुनौतियां

• वर्षा पर निर्भरता:  सिरोही ज़िले के अधिकांश बांध और तालाब मानसून की बारिश पर निर्भर करते हैं — अच्छी बारिश न होने पर अगले सीज़न में पानी की कमी हो जाती है।

• भूजल का अत्यधिक दोहन:  डार्क ज़ोन घोषित होने के कारण भूजल स्तर तेज़ी से नीचे जा रहा है जिससे स्थानीय बांधों और तालाबों का महत्व और भी बढ़ जाता है।

• गाद जमा होना:  समय के साथ बांध की तली में मिट्टी जमा होने से इसकी जल भंडारण क्षमता प्रभावित हो सकती है जैसा कि राजस्थान के अधिकांश पुराने बांधों में देखा जाता है।

• सीमित सार्वजनिक तकनीकी जानकारी:  गुड़ा बांध जैसे छोटे स्थानीय बांधों की सटीक ऊंचाई लंबाई और कुल भंडारण क्षमता जैसी विस्तृत जानकारी बड़े बांधों की तुलना में सार्वजनिक स्रोतों में उतनी आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसके लिए सिरोही ज़िले के जल संसाधन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड ही सबसे भरोसेमंद स्रोत हैं।और इन समुदायों के लिए स्थानीय जल स्रोत आजीविका का एक महत्वपूर्ण आधार हैं।

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